मेरा भारत देश....
नमस्कार, मैं हमारे इस भारत देश की एक युवा आज आपसे कुछ बातचीत करना चाहती हूं. हम सब रोजाना जिंदगी में कुछ ऐसे लोगों को देखते हैं जो कहीं पर भी कचरा फेक देते हैं, गंदगी फैलाते हैं, सार्वजनिक शौचालय का इस्तमाल ना करते हुए कहीं पर भी पेशाब कर देते हैं, जो क्या सच में इस भारत देश के सुजाण नागरिक हो सकते हैं. ऐसे कई लोग हम रोज देखते हैं. पर क्या हम ऐसे लोगों को टोकते हैं. इनको ये हरकते करने से हम रोकते हैं. इन लोगों को अभी नहीं रुकायेंगे तो आनेवाले सालों में ये सृष्टी सच में जीवित रहेगी. आजकल जिस नैसर्गिक आपत्ती से हम सब गुज़र रहे हैं इस सब के जिम्मेदार आखिर कौन हैं? जो लोग कहीं पर कचरा डाल देते हैं, या वो लोग जो बीच सड़क पर ही थुंकते हैं, या वो लोग जो कहीं घुमने जाते हैं और उसी जगह पर गंदगी फैलाकर आ जाते हैं. भारतीय नागरिक होने के कर्तव्य से अगर हम किसी जगह को साफ नहीं कर सकते तो उस जगह पर गंदगी करने का हक भी हमें नहीं. अगर इस भारत देश को, इस सृष्टी को हमें कोई हानी नहीं पहुंचानी हैं तो उठिए और मन में एक ध्येय बना लिजिए की मैं हूं इस भारत देश का सुजाण नागरिक और इस देश को, इस धरती माता को बचाने का सिर्फ मेरा ही हैं हक.
अभी भी वक्त गया नहीं हैं काश, आपके इन बदलाव से किसी की जान बच जाए, किसी का घर तबाह होने से बच जाए, कोई और भी आपकी तरह हंसते - खेलते ये ज़िंदगी अपनों के साथ जी सकता हैं. बस जरुरत हैं तो सोच बदलने की और बदलाव की. आखिर किसी को दुख देना आसान हैं पर किसी के खुशी की वजह बनना बहुत मुश्किल. पर फिर भी क्या हम सब इस भारत देश के एक सुजाण नागरीक होने के कर्तव्य से इतना तो कर ही सकते हैं.
क्यूंकी सोचोगे तो ही इस धरती को हानी पहुंचाने से बचा पाओगे.
🇮🇳७५ स्वंतत्र दिवस की शुभकामनाएं.🇮🇳
धन्यवाद!
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